बांधों में पानी की जगह भर रही है गाद, 2060 तक महाविनाश की चेतावनी

बांधों में पानी की जगह भर रही है गाद, 2060 तक महाविनाश की चेतावनी

री दुनिया में पानी का संकट उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से गहरा रहा है. एक नए और चौंकाने वाले ग्लोबल स्टडी में यह बात सामने आई है कि दुनिया के जलाशय बहुत तेजी से मिट्टी और गाद से भर रहे हैं. इसके चलते उनकी पानी स्टोर करने की क्षमता हर दशक में औसतन 7.3% की दर से कम होती जा रही है. चीनी वैज्ञानिकों के नेतृत्व में की गई यह रिसर्च बताती है कि इसका सबसे विनाशकारी असर छोटे जलाशयों पर पड़ रहा है, जो दुनिया भर में अरबों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करते हैं. यह रिसर्च नेचर सस्टेनेबिलिटी (Nature Sustainability) जर्नल में पब्लिश हुई है, जिसने पहली बार दुनिया के छोटे जलाशयों की इस गंभीर स्थिति को सबके सामने रखा है.

अगर इस संकट को रोकने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले कुछ दशकों में ही मानव आबादी को पीने के पानी और खेती के लिए भयंकर किल्लत का सामना करना पड़ेगा.

क्या है छोटे जलाशयों का अनदेखा खतरा?

  • साइंटिस्ट्स ने रिमोट सेंसिंग, जियोस्पेशियल डेटा और इंजीनियरिंग रिकॉर्ड्स की मदद से ‘ग्लोबल रिजर्वायर इन्वेंट्री’ (GREI) तैयार की है. इसमें दुनिया भर के 5,50,000 से अधिक जलाशयों की पहचान की गई है.
  • इस रिसर्च की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें शामिल 95% से अधिक जलाशय एक स्क्वायर किलोमीटर से भी छोटे हैं. इससे पहले की स्टडीज में इन छोटे जलाशयों के डेटा को अक्सर छोड़ दिया जाता था.
  • रिसर्चर्स के अनुसार, बड़े बांधों की तुलना में ये छोटे जलाशय बहुत तेजी से मिट्टी से भर रहे हैं. लगभग हर पांच में से एक जलाशय अपनी स्टोरेज क्षमता को बहुत तेजी से खो रहा है.
  • सूखे क्षेत्रों जैसे अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से, मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में यह समस्या सबसे ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है.
See also  '15 लाख दो वरना बंद कर देंगे काम...' 7.50 लाख कैश के साथ विजिलेंस के हत्थे चढ़े LDA के JE और सुपरवाइजर

क्यों जरूरी हैं जलाशय और कैसे बढ़ रहा है रिस्क?

जलाशय इंसानी बस्तियों के लिए लाइफलाइन की तरह काम करते हैं. ये बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, पीने के पानी की सप्लाई और हाइड्रोपावर (जलविद्युत) जनरेशन के लिए बेहद जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर हैं. जब नदियों के साथ बहकर आने वाली मिट्टी और गाद बांधों के पीछे जमा होने लगती है, तो उसे सेडिमेंटेशन कहा जाता है.

यह गाद धीरे-धीरे पानी के लिए बची जगह को खत्म कर देती है, जिससे जलाशय की काम करने की क्षमता कमजोर हो जाती है. इसके अलावा नदियों के निचले हिस्सों में मिट्टी का बहाव रुकने से नदियों का नेचुरल स्ट्रक्चर भी बिगड़ रहा है. इससे तटीय क्षेत्रों में कटाव और इकोसिस्टम के तबाह होने का खतरा भी बढ़ गया है.

कहां बने हैं सेडिमेंटेशन के ग्लोबल हॉटस्पॉट्स?

साइंटिस्ट्स ने अपनी इस स्टडी में दुनिया भर के 16 ऐसे हॉटस्पॉट्स की पहचान की है, जहां जलाशयों में गाद जमा होने की रफ्तार सबसे ज्यादा है. इनमें से अधिकतर हॉटस्पॉट्स ऐसे इलाकों में हैं, जहां बड़े पैमाने पर खेती के लिए सिंचाई होती है या जो इलाके पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे हैं.

डेटा के मुताबिक, दुनिया की लगभग एक-चौथाई सिंचित कृषि भूमि इस बढ़ते खतरे की चपेट में है. इसका सीधा असर 2 अरब से भी ज्यादा लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है, जिससे भविष्य में भुखमरी और पानी के लिए बड़े टकराव की स्थिति बन सकती है.

कब तक बेकार हो जाएंगे दुनिया के आधे जलाशय?

रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि अगर मिट्टी को जमा होने से रोकने के प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो साल 2060 तक दुनिया के आधे से ज्यादा जलाशयों की फंक्शनल कैपेसिटी गंभीर रूप से खत्म हो जाएगी. लंबे समय की जल और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अब जलाशयों का सस्टेनेबल मैनेजमेंट करना बहुत जरूरी हो गया है.