चंद्रनगर में जर्जर मकान की छत भरभराकर ढही, मलबे में दबकर दो किशोरियों समेत चार घायल, हैलट में भर्ती

चंद्रनगर में जर्जर मकान की छत भरभराकर ढही, मलबे में दबकर दो किशोरियों समेत चार घायल, हैलट में भर्ती

कानपुर में सीसामऊ थाना क्षेत्र के घनी आबादी वाले चंद्रनगर में शुक्रवार शाम जर्जर मकान की छत भरभराकर ढह गई। इससे दो किशोरियों समेत चार लोग मलबे में दब गए। हादसे से वहां पर अफरातफरी मच गई। इलाकाई लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस और फायर बिग्रेड की टीम ने मलबे में फंसे लोगों को कड़ी मशक्कत से निकालकर हैलट भेजा। वहां उन लोगों का उपचार चल रहा है।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा ने बताया कि चंद्रनगर निवासी मगनलाल के मकान में चार किराएदार राकेश कुमार, लालजी, जगदीश और रवि वर्षों से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि मकान दशकों पुराना और तंग गली में जर्जर हालत में है। ठीक उनके बगल में जयबहादुर का मकान निर्माणाधीन है। शुक्रवार शाम करीब छह बजे लोग अपने घरों में थे, वहीं बच्चे खेल रहे थे।

तेज धमाके की आवाज, मची चीखपुकार
तभी मगनलाल के मकान की छत भरभराकर ढह गई। इसमें लालजी की बेटी अनुष्का(14), रवि की बेटी शुभी (15), जगदीश का 11 वर्षीय बेटा अंश छोटू और राकेश कुमार (30) मलबे में दबकर घायल हो गए। तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास रहने वालों के होश उड़ गए। हादसे के बाद चीखपुकार मच गई। इस दौरान थोड़ी देर के लिए वहां धूल छा गई।  इलाके के लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

घायलों को रेस्क्यू वैन से हैलट में भर्ती कराया
सीसामऊ थाना प्रभारी राकेश कुमार सिंह, कर्नलगंज फायर स्टेशन से दमकलकर्मी की टीम मौके पर पहुंची और एक-एक करके घायलों को मलबे से निकालकर रेस्क्यू वैन से हैलट में भर्ती कराया। हैलट के डॉक्टर के अनुसार राकेश और अनुष्का का अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि अन्य दो को उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। सीएफओ ने बताया कि अगर घटना रात के वक्त होती, तो बड़ी घटना हो सकती थी।

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बनी है 745 जर्जर मकानों की सूची, लेकिन कार्रवाई कभी नहीं
नगर निगम क्षेत्र में कुल 745 जर्जर मकानों की सूची बनी हुई है, लेकिन लापरवाही और उदासीनता के चलते आजतक कार्रवाई नहीं की गई। हर बार केवल नोटिस थमा दिया जाता है। शहर में दर्शनपुरवा, जरनलगंज, हटिया, पुराना कानपुर, मेस्टन रोड, नौघड़ा, बादशाही नाका, कमला टावर, इटावा बाजार, बंगाली मोहाल, बेकनगंज, बर्तन बाजार समेत कई ऐसे इलाके है, जहां मकान गिरने की हालत में हैं।

पूर्व में हादसों में जान गवां चुके लोग

  • रिजवी रोड पर 70 साल पुराना मकान गिरने से रुखसाना और दो बच्चों की जान चली गई थी।
  • जूही गढ़ा में जर्जर मकान गिरने से 24 साल से विशाल की मलबे में दबकर मौत हो गई थी।
  • बिठूर में ढाबे का जर्जर छज्जा गिरने से जुल्फिकार की मौत हो गई थी।
  • बेकनगंज में जर्जर छज्जा गिरने से बुजुर्ग की मौत हो गई थी।

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