‘एक जिंदगी लगभग खत्म हो चुकी थी’, ‘कांटे’ की सफलता का जश्न नहीं

'एक जिंदगी लगभग खत्म हो चुकी थी', 'कांटे' की सफलता का जश्न नहीं

बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर संजय गुप्ता ने अपनी जिंदगी के दुखद पलों को शेयर किया है, जो फिल्म ‘कांटे’ के बाद की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फिल्म ‘कांटे’ की रिलीज के बुरे पलों को याद किया, जब हॉलीडे का सपना देखते हुए वे ICU में पहुंच गए थे।

संजय गुप्ता की मशहूर फिल्म कांटे 20 दिसंबर 2002 को रिलीज हुई थी, जिसमें अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, महेश मांजरेकर, कुमार गौरव, मलाइका अरोड़ा और लकी अली जैसे कलाकार नजर आए। फिल्ममेकर ने इस फिल्म के बाद की घटना को याद करते हुए आज की लाइफ को जिंदगी में अपने लिए दूसरा मौका मान कर चल रहे हैं।

‘कांटे की रिलीज के बाद मेरा एक्सिडेंट हो गया’

उन्होंने मार्कस ऑरेलियस के कोट का हवाला देते हुए कहा है, ‘खुद को मरा हुआ समझो, फिर जो बचा है, उसे सही ढंग से जियो।’ इसी के साथ उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कांटे की रिलीज के बाद मेरा एक्सिडेंट हो गया। लीलावती अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि शुरुआत के 72 घंटे बहुत ही क्रिटिकल है, मैं बच गया। मानो एक जिंदगी तो लगभग खत्म हो चुकी थी और उसके बाद जो भी मिला, वो सब बोनस है। मैं इसे बोनस की तरह ही जीता हूं।’

‘मैं लंबी छुट्टी पर हॉस्पिटल चला गया, करीब 5 वीक तक मैं आईसीयू में रहा’

हाल ही में ‘वाइल्ड फिल्म्स इंडिया’ से बातें करते हुए संजय गुप्ता ने कहा था, ‘हॉलीडे पीरियड के दौरान ये एक्सिडेंट हुआ। मैंने बहुत ज्यादा मेहनत की थी फिल्म कांटे पर और रिलीज पर आफत थी। इतना बड़ा प्रॉजेक्ट, मुझे बहुत सारी चीजें हैंडल करनी थी। मैंने सोचा था कि फिल्म रिलीज होगी और मैं लंबी छुट्टी पर जाऊंगा। ऐसा हुआ कि फिल्म रिलीज हुई और मेरा एक्सिडेंट हो गया और मैं लंबी छुट्टी पर हॉस्पिटल चला गया। करीब 5 वीक तक मैं आईसीयू में रहा।’

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खंडाला से लौटते वक्त उनकी कार भयानक दुर्घटना की चपेट में आ गई

बता दें कि संजय गुप्ता की फिल्म ‘कांटे’ हॉलीवुड की ‘रिजर्वायर डॉग्स’ से प्रेरित थी। इस फिल्म की रिलीज से एक साल पहले लॉस एंजेलिस में शूटिंग के दौरान 9/11 हमलों के कारण कई सीन शिफ्ट करने पड़े थे। फिल्म रिलीज के एक हफ्ते बाद, 27 दिसंबर 2002 को संजय गुप्ता की जिंदगी में ये तूफान आया जब खंडाला से लौटते वक्त उनकी कार भयानक दुर्घटना की चपेट में आ गई। बताया जाता है कि करीब 3 महीने संजय गुप्ता हॉस्पिटल में रहे थे। तब वो केवल 35 साल के थे। फिल्म की सफलता के जश्न की जगह वो तब मौत से लड़ रहे थे।

लोगों ने कहा- बहुत कम लोग सचमुच ऐसे जीते हैं

संजय गुप्ता ने इस घटना के बाद ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘काबिल’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी कई फिल्में बनाईं, जो अंडरवर्ल्ड से जुड़ी थीं। संजय गुप्ता के पोस्ट पर लोगों ने कहा है- ज्यादातर लोग दूसरे मौके की बात करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग सचमुच ऐसे जीते हैं जैसे उन्हें दूसरा मौका मिला हो। एक और ने कहा- कांटे वाकई अपने समय से बहुत आगे थी, सोचा नहीं था सॉन्ग आज भी मेरी पसंदीदा धुनों में से एक है, क्या इसका सीक्वल बनेगा?