पुडुचेरी के एक मशहूर रेस्टोरेंट में बिरयानी खाने गए एक ग्राहक के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उसने सपने में भी उम्मीद नहीं की थी. प्लेट में परोसी गई बिरयानी के अंदर एक मरा हुआ इन्सेक्ट (मक्खी जैसा) था. इसके बाद जो हुआ, उसने इस खबर को पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया है. उपभोक्ता अदालत ने न सिर्फ रेस्टोरेंट पर जुर्माना लगाया, बल्कि एक ऐसा अनोखा फैसला सुनाया जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.
यह घटना 8 दिसंबर 2025 की है. पुडुचेरी के लॉस्पेट में रहने वाले 26 साल के मणिकंदन अपने एक दोस्त के साथ एमजी रोड स्थित एक नामी रेस्टोरेंट में बिरयानी खाने गए थे. उन्होंने 259 रुपये की हैदराबादी रेड चिकन बिरयानी और 299 रुपये की हैदराबादी चिकन जॉइंट बिरयानी ऑर्डर की, जिसका कुल बिल 558 रुपये आया.
मणिकंदन अभी खाना खा ही रहे थे कि अचानक उन्हें बिरयानी के अंदर एक मरा हुआ जीव दिखाई दिया. खाना इतनी गंदगी से बनाया और परोसा गया था कि मणिकंदन की सेहत को बड़ा खतरा हो सकता था. उन्होंने तुरंत सूझबूझ दिखाई और उस खराब खाने की तस्वीरें और वीडियो अपने फोन में रिकॉर्ड कर लिए, जिसमें मरा हुआ इन्सेक्ट साफ नजर आ रहा था. इसके बाद मणिकंदन ने 26 दिसंबर 2025 को पुडुचेरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में रेस्टोरेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. सबसे खास बात यह रही कि मणिकंदन ने इस पूरी कानूनी लड़ाई में किसी वकील की मदद नहीं ली और अपना केस खुद लड़ा.
कोर्ट में रेस्टोरेंट की खुली पोल
अदालत में सुनवाई के दौरान रेस्टोरेंट ने अजीब पैंतरा अपनाया. रेस्टोरेंट ने अपने वकील के जरिए लिखित जवाब भेजकर इस बात से साफ इनकार कर दिया कि ऐसी कोई घटना हुई थी. उन्होंने मणिकंदन की शिकायत को पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया. लेकिन मणिकंदन के पास मजबूत सबूत थे. अदालत ने देखा कि मणिकंदन ने जो वीडियो कोर्ट को सौंपा था, वह बिल्कुल साफ था और उसमें मरा हुआ इन्सेक्ट साफ दिख रहा था. इसके अलावा, मणिकंदन ने रेस्टोरेंट के गूगल रिव्यू का एक स्क्रीनशॉट भी कोर्ट को दिखाया. इस रिव्यू में रेस्टोरेंट ने मणिकंदन की शिकायत पर खुद सरेआम माफी मांगी थी और लिखा था कि यह एक अकेली घटना है और आगे से वे सफाई का पूरा ध्यान रखेंगे
उपभोक्ता अदालत ने रेस्टोरेंट को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एक तरफ तो आप इंटरनेट पर जनता के सामने अपनी गलती मानकर माफी मांग रहे हैं, और दूसरी तरफ कोर्ट में आकर मुकर रहे हैं. रेस्टोरेंट का यह दोहरा रवैया दिखाता है कि वे ग्राहकों की शिकायतों को लेकर कितने लापरवाह हैं. अदालत ने साफ किया कि भारत में खाना बेचने वाले सभी आउटलेट फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्स 2006 के नियमों से बंधे हैं और ग्राहकों को साफ-सुथरा खाना देना उनकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है.
कोर्ट का फैसला: पैसे भी और बिरयानी भी
30 अप्रैल 2026 को उपभोक्ता अदालत ने मणिकंदन के हक में फैसला सुनाया. कोर्ट ने माना कि खाने में कीड़ा मिलना सर्विस में भारी कमी है, जिससे ग्राहक को मानसिक ठेस पहुंचती है. हालांकि, मणिकंदन को इस खाने से कोई शारीरिक बीमारी नहीं हुई थी, इसलिए कोर्ट ने एक संतुलित सजा तय की.
अदालत ने रेस्टोरेंट को आदेश दिया कि वह मणिकंदन को मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के बदले 10,000 रुपये का मुआवजा दे. साथ ही, मणिकंदन के कानूनी खर्च के रूप में 3,000 रुपये अलग से चुकाए.
इसके अलावा, कोर्ट ने रेस्टोरेंट को अपनी गलती सुधारने के लिए एक बेहद अनोखा आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि रेस्टोरेंट को मणिकंदन को हर्जाने के तौर पर कुल 10 प्लेट मुफ्त हैदराबादी चिकन बिरयानी खिलानी होगी. इसके लिए नियम बनाया गया कि अगले 5 हफ्तों तक हर रविवार को रेस्टोरेंट मणिकंदन को 2 प्लेट ताजा और बिल्कुल साफ-सुथरी बिरयानी मुफ्त में परोसेगा. रेस्टोरेंट को यह पूरा भुगतान और आदेश का पालन 30 दिनों के अंदर करना होगा, नहीं तो उन्हें 6 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देना पड़ेगा.










