Tehran: भारत स्थित ईरान दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया है कि अराक (Arak) के एक ग्रामीण इलाके में हुए कथित अमेरिका-इजराइल हमले में तीन दिन के नवजात मोजतबा (Mojtaba), उसकी दो वर्षीय बहन और उनकी दादी की मौत हो गई। दूतावास ने पोस्ट में मोजतबा को “ईरान का सबसे कम उम्र का शहीद” बताया और कहा कि यह हमला एक रिहायशी घर पर हुआ था। पोस्ट के साथ साझा की गई तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों की भावनात्मक प्रतिक्रिया को और तेज कर दिया।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
ईरानी दूतावास की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर नागरिकों की सुरक्षा, युद्ध में आम लोगों की मौत और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही को लेकर नई बहस छिड़ गई। कई लोगों ने युद्ध के मानवीय प्रभाव पर चिंता जताई, जबकि कुछ यूजर्स ने इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि की मांग भी की। फिलहाल ईरान द्वारा किए गए इस दावे की किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या अन्य विश्वसनीय स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका और इजराइल की ओर से भी इस विशेष घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
युद्ध के बीच बढ़ा मानवीय संकट
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच नागरिक हताहतों के दावे लगातार सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल मानवीय संकट को गहरा करती हैं, बल्कि वैश्विक जनमत और कूटनीतिक माहौल को भी प्रभावित करती हैं। भारत स्थित ईरान दूतावास ने दावा किया है कि अराक में कथित अमेरिका-इजराइल हमले में तीन दिन के नवजात मोजतबा, उसकी दो वर्षीय बहन और दादी की मौत हो गई। इस दावे ने सोशल मीडिया पर नागरिक हताहतों, युद्ध की मानवीय कीमत और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।







