माता-पिता को अपनी बेटियों को दहेज नहीं, देनी चाहिए ये 3 चीजें

माता-पिता को अपनी बेटियों को दहेज नहीं, देनी चाहिए ये 3 चीजें

दहेज को कभी बेटी की आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन समय के साथ यह एक ऐसी सामाजिक बुराई बन गया जिसने लाखों परिवारों की जिंदगी प्रभावित की है. आज भी देश में कई महिलाएं दहेज की मांग, मानसिक उत्पीड़न और हिंसा का सामना करती हैं. NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, दहेज से जुड़े उत्पीड़न के कारण एक साल में 5,737 महिलाओं की मौत हुई. यानी औसतन हर दिन 16 महिलाओं ने अपनी जान गंवाई. ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं, बल्कि उन बेटियों की कहानियां हैं जो बेहतर जिंदगी के सपने लेकर ससुराल गई थीं.

इतिहास की बात करें तो दहेज की शुरुआत आज जैसी नहीं थी. पुराने समय में माता-पिता अपनी बेटी को शादी के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए कुछ संपत्ति, गहने या जरूरी सामान देते थे. यह बेटी के अधिकार और सुरक्षा का एक रूप माना जाता था. लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा मांग और लेन-देन में बदल गई. जहां कभी बेटी को कुछ देने की भावना थी, वहीं बाद में लड़के वालों की अपेक्षाएं और दबाव बढ़ने लगे. नतीजा यह हुआ कि दहेज कई परिवारों के लिए बोझ बन गया.

जब भारत में दहेज लेना अपराध तो क्यों हो रहे कांड
वैसे तो भारत में दहेज लेना और देना दोनों कानूनन अपराध हैं. दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज की मांग करना, लेना, देना या इसमें किसी भी तरह की मदद करना दंडनीय माना जाता है. कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 साल की जेल हो सकती है. इसके साथ 15,000 रुपए या लिए गए दहेज की राशि, जो भी अधिक हो, उतना जुर्माना भी लगाया जा सकता है. इस कानून का उद्देश्य दहेज प्रथा को रोकना और महिलाओं को इससे जुड़े उत्पीड़न से बचाना है, पर फिर भी ये अपराध आज भी खुलकर हो रहा है. अगर ये अपराध हो रहा है, तो गलती किसकी ओर से हो रही है? लड़की के माता-पिता या ससुराल. ताली दोनों हाथ से बजती है. बच्ची के अच्छे जीवन के लिए माता-पिता भर-भरकर दहेज तो दे देते हैं, लेकिन कई ससुराल वालों की संतुष्टी इसमें भी नहीं होती, क्योंकि उनकी मांग और भी ज्यादा होती है. फिर क्या? लड़की को जीवनभर दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है और कई बार तो मौत के घाट उतार दिया जाता है.

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ट्विशा शर्मा का केस पिछले कई महीनों से वायरल रहा है. दीपिका नागर केस, दिल्ली पुलिस SWAT कमांडो काजल चौधरी, ग्रेटर नोएडा की निक्की भाटी, अलीगढ़ की नीलम भारती का मामला और भारत के सबसे चर्चित दहेज मामलों में से एक था निशा शर्मा केस. ये तो बस 4-5 नाम के उदाहरण हैं, लिस्ट तो काफी लंबी है. सच बोलूं तो दहेज नहीं, हर बेटियों के माता-पिता को ये 3 चीज जरूर देनी चाहिए…

दहेज के पैसे को शिक्षा पर लगाओ
आज जरूरत इस बात की है कि माता-पिता अपनी बेटियों को दहेज देने के बजाय ऐसी चीजें दें जो पूरी जिंदगी उनके साथ रहें. सबसे पहली और सबसे जरूरी चीज है शिक्षा. जो पैसा कई परिवार शादी और दहेज में खर्च कर देते हैं, अगर उसका बड़ा हिस्सा बेटी की पढ़ाई, स्किल्स और करियर पर लगाया जाए तो वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है. एक शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला के पास फैसले लेने की ताकत होती है. उसे सम्मान पाने के लिए किसी दहेज की जरूरत नहीं पड़ती.

खूब सारा प्यार और आत्मसम्मान
दूसरी चीज है खूब सारा प्यार और आत्मसम्मान की सीख. कई बार लड़कियां ऐसे माहौल में बड़ी होती हैं जहां उन्हें हर बात सहने की सलाह दी जाती है. शादी के बाद अगर कोई उनसे ऊंची आवाज में बात करे, उन्हें नीचा दिखाए या मानसिक रूप से परेशान करे, तो वे उसे सामान्य मानने लगती हैं. इसलिए जरूरी है कि बेटी को बचपन से यह समझाया जाए कि सम्मान उसका अधिकार है. उसे यह एहसास होना चाहिए कि किसी भी रिश्ते में अपमान या डर की कोई जगह नहीं होती.

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माता-पिता का अटूट सपोर्ट
तीसरी और शायद सबसे महत्वपूर्ण चीज है माता-पिता का अटूट सपोर्ट. हर बेटी को यह भरोसा होना चाहिए कि अगर कभी उसे किसी परेशानी का सामना करना पड़े, तो उसके माता-पिता उसके साथ खड़े रहेंगे. उसे यह सोचकर चुप नहीं रहना चाहिए कि समाज क्या कहेगा या मायके वाले क्या सोचेंगे. जब बेटियों को पता होता है कि उनके लिए घर के दरवाजे हमेशा खुले हैं, तो वे गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने का साहस भी जुटा पाती हैं.