पेरिस की गर्मी में सैलानी नोट्रे डेम चर्च देखने के लिए लाइन में लगे हैं. लेकिन उनके पैरों के ठीक नीचे एक अलग ही दुनिया बसाई जा रही है. दरअसल चर्च के ठीक 13 फीट नीचे पुरातत्वविदों की एक टीम खुदाई कर रही है. यह खुदाई समय के पहिये को घुमाकर 2000 साल पुराने रोमन पेरिस में ले जाती है. साल 2019 में आग लगने के बाद नोट्रे डेम का बड़ा हिस्सा गिर गया था. अब 2024 के अंत में इसे फिर से खोला गया है. पेरिस प्रशासन चाहता है कि चर्च के सामने वाले तपते हुए खाली मैदान में पेड़ लगाए जाएं. लेकिन इतनी पुरानी जगह पर बिना जांच के जमीन नहीं खोदी जा सकती है. किसी भी नुकसान से बचने के लिए निर्माण कार्य से पहले खुदाई शुरू की गई है. इसी दौरान सदियों पुराना इतिहास जमीन से बाहर आ गया है. एक बैरियर और लकड़ी के वॉकवे से घिरी यह जगह अब एक ओपन आर्कियोलॉजिकल साइट बन गई है.
दा विंची कोड जैसी पहेली आखिर कैसे बन गए ये पुराने बर्तन?
फ्रांसीसी मीडिया इस खोज को सदी की सबसे बड़ी खुदाई बता रहा है. पेरिस आर्कियोलॉजी यूनिट की कंजर्वेटर लूसी एल्टनबर्ग ने इस बारे में बात की है. लूसी ने कहा, ‘पेरिस के इतिहास को समझने और उसमें बदलाव करने का यह हमारे लिए एक दुर्लभ अवसर है’. यहां सैकड़ों पुरानी चीजे मिली हैं.
इनमें चौथी सदी का एक सिक्का मिला है जिस पर सम्राट कॉन्सटेंटाइन का चेहरा बना है. इसके साथ ही मध्यकालीन बर्तनों के टुकड़े भी मिले हैं. इन बर्तनों के अंदर ऐसे निशान पेंट किए गए हैं जिन्हें अभी तक कोई डिकोड नहीं कर सका है. यह किसी आधुनिक दा विंची कोड की तरह लग रहा है. मैनचेस्टर से आई एक टूरिस्ट एमिली कार्टर भी इस खोज से हैरान थीं. एमिली ने कहा, ‘आप चर्च देखने आते हैं और पता चलता है कि पैरों के नीचे एक और शहर है’.
पुराने शहरों की जमीन के नीचे क्यों दबे होते हैं सदियों पुराने राज?
यह हर पुराने शहर की कहानी है. इतिहास सिर्फ म्यूजियम में नहीं होता बल्कि यह सड़कों के नीचे दबा होता है. जैसे-जैसे शहर विकसित होते हैं उनका स्तर भी ऊपर उठता है. हर युग पुराने युग के मलबे पर नई इमारतें बनाता है. रोम में पांचवीं सदी के बाद से जमीन का स्तर लगभग 30 फीट तक बढ़ चुका है. इसी तरह 2004 ओलंपिक के लिए जब एथेंस में मेट्रो बनी तो हजारों प्राचीन चीजें मिली थीं.
पेरिस का मामला भी कुछ ऐसा ही है. इस शहर की शुरुआत सीन नदी के इले डे ला साइट द्वीप से हुई थी. सदियों बाद उसी जमीन पर नोट्रे डेम चर्च बनाया गया. खुदाई का नेतृत्व कर रहीं आर्कियोलॉजिस्ट केमिली कोलोना ने इस पर अहम जानकारी दी. केमिली ने कहा, ‘1163 में जब चर्च बना तो यह पूरा इलाका मध्यकालीन घरों से भरा था’.
13 फीट गहरी जमीन में कैसे सिमट गया 20 सदियों का पूरा इतिहास?
खुदाई करने वाली टीम अब उन पुराने घरों के तहखानों तक पहुंच गई है. इन तहखानों के नीचे और भी पुराना इतिहास छिपा है. छठी से 10वीं सदी तक के अनाज के गड्ढे यहां मिले हैं. इससे नीचे जाने पर चौथी और पांचवीं सदी का रोमन इलाका नजर आता है. कुल मिलाकर महज 13 फीट गहरी मिट्टी में 20 सदियों का इतिहास एक के ऊपर एक टिका है. एक आर्कियोलॉजी स्टूडेंट यास्मीन बेनाली भी इस नजारे को देखकर रोमांचित हो गईं.
यास्मीन ने कहा, ‘यहां आप मध्यकालीन पेरिस और रोमन पेरिस की अलग-अलग परते साफ देख सकते हैं’. सबसे दिलचस्प चीजे उन जगहों से मिली हैं जो कभी लैट्रिन और कूड़ाघर हुआ करते थे. सदियों पहले फेंके गए जग और कप आज भी सही-सलामत मिल रहे हैं. नरम कचरे ने इन बर्तनों को टूटने से बचा लिया.
जंग खाए सिक्कों से कब और कैसे पता चलता है इतिहास का सही समय?
खुदाई में कुछ ऐसे भी बर्तन मिले हैं जिन्होंने एक्सपर्ट्स को उलझा दिया है. इन्हें साफ करने पर अंदर की तरफ लाल रंग की रहस्यमयी लिखाई मिली है. इन निशानों का मतलब अभी तक डिकोड नहीं हो पाया है.
यूनिट की आर्कियोलॉजिस्ट वेलेंटाइन ब्रेलौक्स ने इन्हें सबसे ज्यादा हैरान करने वाला बताया है. इसके अलावा खुदाई में मिले सिक्कों पर जंग लगी थी. लेकिन एक्स-रे करने पर पता चला कि यह 300 ईसवी के रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन का चेहरा है.
लूसी एल्टनबर्ग के मुताबिक ऐसे सिक्के जमीन की परतों की सही तारीख बताने में बहुत काम आते हैं. आर्कियोलॉजिस्ट्स के लिए रोमन काल की चीजे सबसे ज्यादा कीमती हैं. रोमन काल में इस शहर को लुटेटिया कहा जाता था. जब रोमन साम्राज्य गिरा तो लोग उसी द्वीप पर लौट आए जहां बाद में नोट्रे डेम बना.
शहर के सौंदर्यीकरण के बीच कहां मिला इतना बड़ा ऐतिहासिक खजाना?
खुदाई में मिला हर सामान शहर के आर्कियोलॉजी सेंटर में भेजा जा रहा है. केमिली इसे पेरिस का खजाना मानती हैं. आमतौर पर पुरातत्वविदों को खुदाई का मौका तभी मिलता है जब कोई नया निर्माण होने वाला हो.
लूसी का कहना है कि पेरिस शहर की सुंदरता बढ़ाने के फैसले के कारण ही यह खुदाई संभव हो सकी. नया स्क्वायर 2028 तक बनकर तैयार हो जाएगा. यहां 160 नए पेड़ लगाए जाएंगे और गर्मियों में ठंडक के लिए पानी की हल्की परत बनाई जाएगी. ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए यह तैयारी की जा रही है. तब तक आर्कियोलॉजिस्ट्स रोमन काल से भी पीछे जाकर गॉल सभ्यता की खोज करना चाहते हैं. लूसी ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि हम इतिहास में और भी पीछे जाने में सफल होंगे’.











