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छलावा की कहानी

यह कहानी हमारे गाँव के प्रसिद्ध पहलवान जिसका नाम पृथ्वी पहलवान था उसकी है, वो हमारे गाँव ही नहीं आस-पास के सभी गाँव में सबसे बड़ा पहलवान था, वो आज तक किसी से नहीं हारा था, कोई भी पहलवान उससे कुश्ती लड़ने से कतराता था और उसके सामने कुश्ती लड़ने की हिम्मत उस समय किसी पहलवान में नहीं होती थी तो फिर आम लोगों की तो बात ही नहीं कर सकते!

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पृथ्वी के परिवार की खेती-बाड़ी की काफी ज़मीन थी जिसपर उनका परिवार खेती करता था, उनके परिवार ने काफी बड़ा घर रहने के लिए बनाया हुआ था जिसमें अंदर वाले हिस्से में कमरे बने हुए थे और बाहर वाले हिस्से में उनके पशु बंधते थे और काफी सारी जगह वहाँ पशुओं के बंधने के बाद भी खाली रह जाती थी जिसको वो “घेर” कहते थे,

इसी घेर में पृथ्वी पहलवान सोया करता था बाकि घरवाले अंदर कमरों में सोते थे, पृथ्वी की अभी शादी नहीं हुई थी और न ही उसको कोई काम की फ़िक्र थी उसको तो उसके परिवार ने बस पहलवानी के लिए छोड़ा हुआ था और वो पहलवानी में ‘निपुण’ (कुशल) भी था इसलिए उसका डंका पूरे जिले में बजता था! पृथ्वी को सुबह उठकर कसरत करना पूरे दिन खाना और रात को उस खाली मैदान यानि की घेर में सो जाना, बस इतनी ही पृथ्वी की दिनचर्या थी!

छलावा की ललकार Bhoot Pret ki Kahaniya

छलावा की ललकार | Chalava

ऐसे ही वो एक रात सो रहा था एक बजे का समय था उसके कान में एक आवाज पड़ने लगी जिसको सुनकर वो गुस्से में उठ गया, उसने देख एक कि एक 50 साल का आदमी उसका नाम लेकर उसको उठा रहा था, पृथ्वी ने उससे पूछा कि कौन है तू और तूझे क्या चाहिए?

उस व्यक्ति ने उत्तर दिया मेरा नाम ब्रह्म है मैं पास के गाँव से तुम्हारे पहलवानी के किस्से सुनकर आया हूँ तुमसे मिलने आया हूँ, मैं दिन में शहर जाकर काम करता हूँ इसलिए रात को ही मेरे पास समय रहता है, पृथ्वी ने पूछा कि तुझे आखिर मुझसे क्या चाहिए? ब्रह्म ने कहा कि ‘मुझे तेरे साथ कुश्ती करनी है और तेरी पहलवानी का गुरुर तोडना है क्यूंकि मुझे तो तू कोई बड़ा पहलवान नहीं नज़र आता’

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पृथ्वी ने उसको ऊपर से नीचे तक देखा तो उसकी कद-काठी एकदम सामान्य थी और कहीं से भी वो पहलवान नहीं लग रहा था, पृथ्वी को नींद बीच में टूटने का गुस्सा तो था ही साथ में उसने पृथ्वी को ललकारके पृथ्वी की सब्र की सारी सीमायें भी तोड़ दी थी इसलिए पृथ्वी ने सोचा 2-4 मिनिट की बात है अभी इसको ऐसा उठा कर पटकूँगा कि भागता नज़र आएगा,

पृथ्वी ने फिरभी कहा कि ‘एक बार और सोच ले, तेरी इस उम्र में हड्डियां टूट जाएं तो आसानी से नहीं जुड़ेंगी’ इसपर ब्रह्म ने हंसकर कहा कि ‘पृथ्वी डर लग रहा है तो मेरे पैर पकड़ ले और खुद को सबसे बड़ा पहलवान कहलवाना बंद करदे, अगर तू ऐसा करता है तो मैं यहाँ से अभी बिना कुश्ती किए चला जाऊँगा’

छलावा और पहलवान में कुश्ती Horror Story

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इसपर पृथ्वी का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया उसने सोचा इसको अब ऐसा सबक सिखा कर भेजूँगा कि पूरा गाँव हमेशा याद रखे, पृथ्वी ने ब्रह्म से कहा कि ठीक है हम कुश्ती करेंगे और ये कहकर पृथ्वी उसको उसकी खाली मैदान में थोड़ा आगे अपने अखाड़े में ले गया जहाँ जाकर दोनों में कुश्ती शुरू हो गई, पहले तो पृथ्वी ने ब्रह्म को पकड़कर पटकने का सोचा मगर ब्रह्म पृथ्वी की पकड़ से बार-बार छूट जाता ऐसे ही काफी समय तक चलता रहा और आधे से ज्यादा समय इसमें ही निकल गया!

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ब्रह्म बार-बार पृथ्वी की पकड़ से निकलता जा रहा था और पृथ्वी की झुंझलाहट बढ़ती जा रही थी, ऐसा काफी देर चलने के बाद इस बार ब्रह्म ने पृथ्वी को पकड़ लिया और जोर से पटक दिया, पृथ्वी की मानो जैसे जान ही निकल गई हो, इतने में मंदिरों में घंटीयाँ बजने लगी, सुबह हो गई थी, ब्रह्म ने कहा कि ‘पहलवान अभी तो मुझे जाना पड़ेगा मेरे काम पर जाने का समय हो गया है, तू आज रात तैयार रहियो, इस कुश्ती को आज रात आगे बढ़ायेंगे, इतना कहकर ब्रह्म वहाँ से चला गया और पृथ्वी भी उठकर नहाने धोने चला गया मगर पृथ्वी के शरीर में काफी दर्द था,

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पृथ्वी ने पूरे दिन अच्छे से खाया-पिया और बस आराम किया, पृथ्वी ने अपनी रात की बात किसी को नहीं बताई क्यूंकि उसको डर था कि कहीं कोई उसको कमजोर न समझ ले और उसके नाम पर कोई आंच न आ जाये, गाँव में रात को 7-8 बजे तक लोग सो जाया करते थे तो पृथ्वी भी बाहर घेर में आकर सो गया मगर वो जानता था कि ब्रह्म रात को आएगा जरुर और आज उसको ऐसी ‘धोबीपछाड़’ मारूँगा के वो यहाँ से भाग जायेगा और कभी मुड़कर नहीं आएगा, इतना सोच कर पृथ्वी सो गया!

पहलवान को लगा झटका जब छलावा ने पटका Horror Short Stories in Hindi

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उसकी सोच के हिसाब से ही ब्रह्म रात एक बजे के आस-पास आया और उसकी खाट के पास आकर उसको लालकरने लगा, ब्रह्म ने कहा कि ‘पहलवान उठ जा, देख मैं अपने वादे के हिसाब से आ गया हूँ,

चल वो कल वाला खेल निपटा लेटे हैं’ ये सुनकर पृथ्वी की आँखों से नींद जाती रही और अब वो उठकर कल के अपमान का बदला लेना चाहता था तो दोनों अखाड़े में जा पहुँचे, पृथ्वी ने अखाड़े में पानी का छिड़काव किया तो अब दोनों की कुश्ती शुरू हो गई, शुरू से ही ब्रह्म बार-बार पृथ्वी को पटकता रहा, जब जी चाहता पृथ्वी को उठा लेटा और पटक देता, ब्रह्म पृथ्वी की पकड़ में या तो आता नहीं अगर पकड़ में आ भी जाये तो चित करने से पहले वो मछली जैसे फ़िसल कर उसकी पकड़ से निकल जाता,

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ऐसा ही काफी देर चलता रहा, पृथ्वी की हालत काफी खराब लग रही थी वो मुश्किल से ही उठ पा रहा था उधर ब्रह्म ऐसा लग रहा था मानो अभी एकदम तरोह-ताज़ा है, पृथ्वी को बस एक बार पटके जाना था और उसकी हार निश्चित थी मगर फिर से पास के मंदिर में आरती होने और घंटीयाँ बजने की आवाजें आने लगी और ब्रह्म वहाँ से पृथ्वी को छोड़ कर जाने लगा और जाते हुए बोला कि ‘पृथ्वी आज रात मैं फिरसे आखिरी बार आऊंगा और इस मुकाबले का फैसला आज रात ही होकर रहेगा,

चाहे तू जीते या मैं जीत जाऊं’ इतने कहकर वो वहाँ से निकल गया और पृथ्वी उठकर घरवालों से छुपता हुआ घर के एक कमरे में जाकर लेट गया, पृथ्वी का पूरा शरीर दर्द से टूटा हुआ था लेकिन उसका मन उससे भी ज्यादा चोटिल था क्यूंकि पृथ्वी को खुद की ताकत और शैली पर जितना यकीन और मान था उसके इन दो रातों में हज़ारों टुकड़े हो चुके थे जिसको वो समेटने की असफल कोशिश किए जा रहा था!

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बूढ़े वैध ने सिखाया पहलवान को आखिरी दाव Horror Kahaniyan

बूढ़े वैध | budha vaid

दोपहर हुई पृथ्वी ने खुद को संभाला और गाँव के बूढ़े वैद के पास जाकर शरीर दर्द की दवाई देने को कहा, वैद ने कहा कि ‘पृथ्वी पहले मुझे अपने घाव तो दिखाओ तभी मैं तुम्हारी दवाई बना कर दे पाउँगा’ पृथ्वी ने ओढ़े हुए कम्बल को हटाकर अपने शरीर पर लगे सभी ‘घाव’ वैद को दिखाए तो बूढा वैद हैरान होकर बोला ‘पृथ्वी तुझे कितने लोगो ने मारा है? तू हमारे जिले का सबसे बड़ा पहलवान है, मैं तुझे एकदम ठीक कर दूँगा मगर पहले बता ये सब हुआ कैसे?

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पृथ्वी ने दोनों रातों की सारी बात बूढ़े वैद को बताई, वैद ने भी अपने जीवन के 80 बसंत इसी गाँव में अनुभव कमाते हुए गुज़ारे थे और उनको औषधि की जानकारी के साथ तंत्र-मन्त्र का भी ज्ञान था इसलिये बुढ़े वैद को सारा माज़रा समझते देर न लगी और उसने घाव के लिए लेप तो दिया ही साथ में ब्रह्म का सामना करने की तरकीब भी बताई और आटा छानने वाली एक छन्नी भी पृथ्वी को दी, पृथ्वी सब समझ चुका था और बूढ़े वैद से मिलकर पृथ्वी की हिम्मत भी बढ़ी थी!

मंत्र की मार, छलावा गया हार Ghost Stories

अब पृथ्वी घर आकर अपने घाव पर लेप लगाता है और रात का इंतजार करता है! फिर वही एक बजे के आस-पास ब्रह्म की आवाज़ आती है ‘पृथ्वी उठ जा, आ इस दो रातों से चल रही कुश्ती का अंत करते हैं, आज तेरी पहलवानी की भी आखिरी रात होगी’

मंत्र की मार | Mantra ki mar

पृथ्वी तो सोया ही नहीं था क्यूंकि उसको तो रात का ही इंतजार था, तो वो मुस्कुराते हुए खाट से उठा और बोला कि ‘हाँ आज इस कुश्ती की आखिरी रात ही होगी, कल से हम नहीं मिलेंगे’ इतना कहकर पृथ्वी और ब्रह्म अखाड़े की ओर चल दिये,

ब्रह्म अखाड़े के बीच खड़ा होकर बोला ‘आजा पृथ्वी पहले तू लगा ले जितना ज़ोर तुझ में बचा है फिर मैं तुझे मौका नहीं दूँगा’ पृथ्वी ने कहा ‘यार आज हम लड़ने से पहले अखाड़े में थोड़ा पानी का छिड़काव कर लेते हैं फिर कुश्ती शुरू करेंगे क्यूंकि लड़ते समय धूल बहुत उड़ती है, ब्रह्म तू ये बर्तन ले ओर सामने वाले जोहड़ से पानी लेकर आजा फिर हम कुश्ती शुरू करेंगे’

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इतना कह कर पृथ्वी ने वो मन्त्र पढ़ी छन्नी कागज़ के लिफाफे से निकलकर जल्दी से ब्रह्म के हाथ में दे दी, ब्रह्म समझ तो गया कि छन्नी में पानी नहीं भरा जायेगा मगर उसको पता था की मैं फिर भी पानी भरकर आज ले आऊँगा ओर इससे कुश्ती करके आज इसको मारकर ही जाऊँगा,

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ब्रह्म जोहड़ की तरफ गया और पानी भरने की कोशिश करने लगा मगर पानी भर ही नहीं रहा था, ब्रह्म तो थोड़ा आश्चर्य हुआ की पानी छन्नी में आ क्यों नहीं रहा है, ब्रह्म ने अपनी पूरी शैतानी शक्ति लगा दी मगर छन्नी में पानी नहीं भर सका, जैसे ही जोहड़ में पानी लेने के लिए छन्नी डालकर निकलता वो खाली ही निकलती, वो मन्त्र पढ़ी छन्नी थी और ब्रह्म ने उसको हाथ में लेकर कहा था कि मैं पानी लेकर आऊँगा, न तो उस छन्नी में पानी भर सकता था और न ही ब्रह्म बिना पानी लाये कुश्ती कर सकता था

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क्यूंकि मन्त्र वाली छन्नी लेकर उसने पानी लाने की बात कही थी, पानी भरने की कोशिश करते हुए सुबह हो जाती है, न ब्रह्म पानी ला पाता है और ना वो कुश्ती करके पृथ्वी की जान ही ले पाता है, ब्रह्म सुबह होते ही अदृश्य हो जाता है और पृथ्वी की जान बच जाती है!

छलावा ऐसे खेलता है मौत की बाज़ी Horror Story in Hindi

कुछ देर बाद पृथ्वी बूढ़े वैद के पास जाकर रात की सारी बातें बता देता है और उनके पैर छूकर उसको अपनी जान बचाने के लिए धन्यवाद देता है! पृथ्वी वैद से कहता है कि ‘वैद बाबा ये तो बताओ वो ‘बला’ आखिर थी क्या और वो रात को लौटकर क्यों नहीं आया?’

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वैद बाबा बताते हैं कि’ वो एक छलावा था जो दो रातों से तुम्हारे साथ खेल रहा था उसका पूरा खेल तीन रातों का था और वो तुम्हें धीरे-धीरे कमज़ोर कर रहा था, कल की रात अगर तू वो ‘छन्नी’ उसको नहीं देता तो तेरी मौत निश्चित थी, वो छन्नी मैंने मन्त्र पढ़ कर तुझे दी थी जिसकी वजह से उसको छूते ही वो उसके साथ बंध गया और पानी लाने को मजबूर हो गया, कोई समान्य छन्नी होती तो वो उसमें आसानी से पानी भर लाता और उसके बाद अपने खेल का अंत तुझे मारकर कर देता मगर तेरी किस्मत ने तुझे मेरे पास भेजकर बचा लिया’

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तो ये थी छलावे के खेल की दो कहानियाँ! छलावा एकदम से इन्सान को नहीं मारता, वो तो पहले अपना खेल ‘रचकर’ उसमें इन्सान को फंसाकर पहले इन्सान के साथ खेलता है फिर जब इन्सान वो खेल समझने लगता है या वो खेल पूरा हो जाता है उसके बाद वो इन्सान को मार देता है!!

छलावा:
रूप धरके जानवर से इन्सान और इन्सान से जानवर बनता है,
ये छलावा है हुज़ूर, ये छल और कपट से वार करता है!
पहले तो खूब खेलता है इन्सान से फिर उसको चौंकाकर मार देता है,
ये छलावा है हुज़ूर, ये छल और कपट से वार करता है!