डाॅक्टरों का गिरोह करा रहा बच्चा चोरी
मनौना धाम से बच्चा चोरी कराने वाले गिरोह के मुख्य सदस्य उत्तम वाजपेई को पुलिस ने जेल भेज दिया। पूछताछ में उसने स्वीकारा कि उसी ने यह बच्चा चोरी कराया था। आरोपित ने अपने गिरोह में शामिल तीन डाक्टरों के भी नाम बताए हैं। कहा कि वह ही आगे की डील करते थे। पूर्व में आरोपित उत्तम दो बच्चों को दो-दो लाख रुपये में बेच चुका है।
ये दोनों बच्चे बरेली के एक मेडिकल कालेज की स्टाफ नर्स को दिए गए थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। उनकी गिरफ्तारी के बाद गिरोह से जुड़े अन्य लोग व खरीदारों के नाम सामने आएंगे। सभी आरोपितों को मुकदमे में शामिल कर मानव तस्करी की भी धारा बढ़ाई
मनौना धाम से 24 मई को डेढ़ साल के मासूम ऋषभ के अपहरण करने वाले योगेश कन्नौजिया और पवन सिंह को पुलिस ने पकड़ा तो पूरा गिरोह सामने आ गया। जैसे-जैसे पुलिस की विवेचना आगे बढ़ी वैसे-वैसे गिरोह में शामिल लोगों के नाम खुलना शुरू हो गए।
योगेश से पूछताछ के बाद पुलिस ने लखीमपुर निवासी उत्तम को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ की गई तो उसने स्वीकार लिया कि उसी ने योगेश और पवन से बच्चा चोरी करने को कहा था। बदले में उन्हें 60 हजार रुपये भी देने की बात तय हुई थी।
उत्तम ने बताया कि बच्चा उससे एक डाक्टर ने मांगा था। पुलिस ने आगे जांच की तो दो डाक्टरों व एक स्टाफ नर्स का नाम सामने आया। अभी तक की जांच में पता चला कि है वे दोनों डाक्टर लखीमपुर खीरी के ही हैं।
उनसे एक स्टाफ नर्स ने बच्चा उपलब्ध कराने के लिए कहा था। एक डाक्टर अपना क्लीनिक और अस्पताल संचालित करता है। पुलिस ने देर रात दो डाक्टरों को हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ के आधार पर पूरी कहानी स्पष्ट होगी।
पूर्व में चार लाख रुपये में बरेली में ही बेचे थे दो बच्चे
पूछताछ में आरोपित उत्तम ने बताया कि इससे पहले वह दो बच्चों को चार लाख रुपये में बेच चुका था। पहला नवजात बच्चा उसने लखीमपुर निवासी डाक्टर संजय विश्वास से 1.20 लाख रुपये में खरीदा और दूसरा बच्चा उसने लखीमपुर के ही केशवराम उर्फ मंजेश से खरीदा था। आरोपित ने बताया कि उन दोनों बच्चों को उसने बरेली के ही एक मेडिकल कालेज की स्टाफ नर्स सीता को दो-दो लाख रुपये में बेचा था।
लंबे समय से चल रहा था यह गिरोह, कई बच्चे बेचने की आशंका
पुलिस का कहना हैं कि अभी तक की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि, यह गिरोह लंबे समय से इस तस्करी में शामिल था। वह अक्सर ऐसे बच्चों पर नजर रखते थे जो नवजात होते थे। आशंका है कि इस गिरोह में प्रदेश के अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसके लिए लगातार जांच की जा रही है।