कानपुर में साइबर ठगों को प्री एक्टिवेट सिम मुहैया कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पांच आरोपी गिरफ्तार
साइबर ठगों को प्री एक्टिवेटेड सिम मुहैया कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यह गिरोह दक्षिणी दिल्ली में काल सेंटर और सिमकार्ड बिक्री करने के आफिस की आड़ में यह धंधा बरसों से कर रहा था। पनकी थाने में दर्ज एक मुकदमे में पुलिस ने जांच शुरू की तो मामला सामने आया। पुलिस ने गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
तीन आरोपित गाजियाबाद, एक फरीदाबाद और एक नई दिल्ली का रहने वाला है। ऐसा अनुमान है कि गिरोह का नेटवर्क सिंगापुर, दुबई समेत कई देश के ठगाें से जुड़ा है।
फिलहाल पुलिस को नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर गिरोह के सदस्यों द्वारा कानपुर, अलीगढ़, गाजियाबाद, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों में की गई 11 ठगी की घटनाओं का पता चला है, जिसमें 36 लाख रुपये ठगे गए। आरोपितों के पास से 12383 सिमकार्ड (6000 चालू नहीं), 40 एटीएम कार्ड मिले हैं।
हैदराबाद की आईटी कंपनी में काम करने वाले गंगागंज निवासी केशव अग्निहोत्री ने 27 मई को पनकी थाने में आइटी एक्ट और धोखाधड़ी की धारा में मुकदमा कराया था। आठ अप्रैल को एक प्रमोशनल काल (किसी नए उत्पादों व छूट देने की जानकारी के लिए की गई काल) के जरिए उन्हें बताया गया कि वह मित्रा पेज को रिव्यू कर रिवार्ड कमा सकते हैं।
इसके बाद रिया शर्मा नाम की युवती ने वाट्सएप पर काल की। उन्होंने टेलीग्राम का लिंक भेजा और उसे खोलकर रिव्यू कर रुपये भेजने को कहा गया। बताया गया कि हर टास्क को करने के लिए पहले कुछ रुपये लगाने होंगे। उसमें जो रुपये जीतेंगे वह उन्हें भेजा जाएगा।
लालच में आकर आठ से 10 अप्रैल तक आरोपितों के बताए बैंक खाते में अलग-अलग खातों में विभिन्न माध्यमों से लगभग 15 बार में 3.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे।
लगातार रुपये ट्रांसफर कराने से जब उन्होंने इन्कार किया तो बताया गया कि जमा रकम डूब सकती है। पांच लाख और जमा करो तो 10 लाख निकाल सकते हो। ठगी का अहसास होने पर आनलाइन साइबर सेल पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि पुलिस ने केशव की तहरीर पर जांच शुरू की और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का डेटा खंगाला। सामने आया कि जिस गिरोह ने केशव को चपत लगाई है, उसने कानपुर में तीन और, गुजराज में तीन, अलीगढ़, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड में 11 लोगों से लगभग 36 लाख रुपये की ठगी की है।
सभी के मोबाइल नंबर दक्षिणी दिल्ली के बदरपुर में एक्टिवेट मिल रहे थे। पुलिस ने उस मोबाइल नंबरों के आइएमईआइ रन कराया तो पता चला कि उन फोन पर सैकड़ों सिम लगाए जा चुके हैं।
इधर पुलिस जांच कर रही थी, उधर शुक्रवार की रात पुलिस को आरोपितों की लोकेशन पनकी में पंतजलि गोदाम के पास हाईवे पर बने अंडरपास के नीचे की मिली। पुलिस ने दबिश देकर पांच लोगों को दबोचा। पूछताछ में
उन्होंने अपना नाम गाजियाबाद के इंद्रापुर थाना क्षेत्र के वसुंधरा निवासी ऋषि शर्मा, गाजियाबाद के थाना मधुवन बानू थाना क्षेत्र के संजय नगर निवासी उत्सव त्यागी, दुर्गेश कुमार, नई दिल्ली के प्रहलादपुर निवासी अजय मित्तल और हरियाणा के भवन सराय ख्वाजा सेक्टर 37 निवासी सचिन बताया। अजय मूलरूप से आगरा का रहने वाला है।
आरोपितों में ऋषि शर्मा और उत्सव नेक्स जेनरेशन इंटरप्राइजेज को संचालित कर रहे थे, जबकि श्री श्याम इंटरप्राइजेज नाम एक अन्य काल सेंटर को अजय मित्तल चला रहा था। सचिन व दुर्गेश सिम एक्टिवेट करने का काम करते थे और अजय से जुड़े थे। यह लोग एक निजी टेलीकॉम कंपनी के सिमकार्ड के अधिकृत विक्रेता या चैनल पार्टनर बन गए थे।
इसके साथ ही ऋषि ने दक्षिण दिल्ली के बदरपुर में एक काल सेंटर भी खोला था, जिसमें 20 युवतियां काम करती थीं। इस काल सेंटर में विभिन्न कंपनियों के उत्पादों के प्रचार और सर्विस के बारे में जानकारी दी जाती थी।
ये लोग व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के नाम पर सिम बिक्री कर प्री एक्टिवेट कर देते थे। इसी की आड़ में गिरोह आनलाइन गेम खिलाने के बहाने लोगों को टास्क में फंसाकर साइबर ठगी भी करता था।
इस तरह से काम करता था गिरोह
पुलिस आयुक्त ने बताया कि उत्सव त्यागी और ऋषि शर्मा फर्जी फर्में बनाकर टेलीकाम कंपनी से सैंकड़ों की संख्या में सिमकार्ड खरीदते थे और उस सिमकार्डां को अजय मित्तल और सचिन कुमार को उपलब्ध कराते थे। अजय मित्तल के पास से ही 2000 सिमकार्ड मिले हैं।
आरोपित दुर्गेश उन सिमकार्डों को प्री एक्टिवेट कराता था। फिर साइबर ठगी से जुड़े गिरोहों को मोबाइल नंबरों की जानकारी दी जाती थी। दूर बैठा साइबर ठग उस नंबर से वाट्सएप शुरू करता और इधर बैठे गिरोह के लोग वाट्सएप शुरू करने के लिए ओटीपी बताते।
इसके बाद वाट्सएप के वाइस कालिंग के जरिए ठगी की घटनाएं की जातीं। पकड़े जाने के डर या ठगी की घटना होने के बाद उक्त वाट्सएप नंबर को बंद कर दिया जाता।